कर सकते हैं ज़िन्दगी में कुछ काम
तो कुछ ऐसा करें
की अपने सपने सजाते हुए एक ज़रुरत मंद का सपना सजाया जाए.
छु सकते हैं अगर आसमान
तो कुछ ऐसे छुएं
की ऊँचाइयों पे अपनों के दर्द को भूलाया ना जाए.
बन सकते हैं अगर बड़ा
तो इतना बड़ा बनें
की सब के सुख और दुःख का हिसाब रखा जाए.
और अगर ये सब न कर सकें
तो कम से कम इतना करें
की अपने आप और अपने कर्मों की जिमेदारी उठाई जाए .
कम से कम इतना करें
की आने वाली नस्लों के लिए एक अमन की दुनिया बसाई जाए.
और
इस जहाँ को आज की चका चोंध के लिए कुर्बान न किया जाये, कुर्बान न किया जाये, न किया जाए.
1 comment:
कर्मों की ज़िम्मेदारी --- as good as गीता ग्यान!!!
hope it inspires atleast one `arjun`!!!
keep it up!!!
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